Balaji Wafers Success Story : 90 रुपए की सैलरी छोर कर किये थे बिजनेस की शुरुआत आज 4000 करोड़ की कम्पनी

Balaji Wafers Success Story : सफल होने के लिए आपको अपने दिल को अपने व्यापार में लगाना होगा, और अपने बिज़नेस को अपने दिल में रखना होगा | ठीक इसी तरह व्यापार को दिल से और बिजनेस को दिल मे रख कर शुरू किए थे Balaji Wafers के फाउंडर Chandubhai Virani ने 90 के दशक में मात्र 90 रुपए की सैलरी को छोड़कर Chandubhai Virani ने शुरू किए थे अपने वेफर्स की बिजनेस जो आज बन चुकी है करोड़ों की कंपनी तो आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि  Chandubhai Virani ने अपने इस स्टार्टअप को कैसे 5000 करोड़ की कंपनी के रूप मे खड़ा किया |
Balaji Wafers की शुरुआत की कहानी 

वह कहते हैं ना जिनकी नस-नस में हो बिजनेस वह है गुजराती | चंदू भाई  विरानी अपने 15 वर्ष की उम्र में ही अपने भाई के साथ मिलकर गुजरात में एक कैंटीन बिजनेस की शुरुआत करते हैं, परंतु उनको शुरुआती दौर में ही वह बिजनेस फेल हो जाने के कारण वह बिजनेस को बंद करना पड़ता है | फिर उसके बाद वह उनके परिवार सहित सभी लोग अलग-अलग कोई काम पकड़ लेते हैं, फिर चंदू भाई विरानी एक सिनेमा हॉल में एक गार्ड का काम करने लगते हैं उसी के साथ-साथ वह छोटे-मोटे पोस्टर लगाने का काम टिकट कलेक्ट करने का काम यह भी करने लगते हैं | फिर थिएटर के ओनर ने उनकी ईमानदारी और मेहनत और लगन को देखकर के थिएटर के ओनर अपने कैंटीन का ठेका उन्हें दे देते हैं | शुरुआत में उन्होंने थिएटर में मसाला सैंडविच और अन्य चीजों को बेचना शुरू किया था, परंतु उनमें ज्यादा प्रॉफिट ना होने के कारण वह उसे भी बेचना बंद कर देते हैं | फिर वह सोचते हैं कि ऐसा क्या बेचा जाए जिससे उन्हें प्रॉफिट किया जाए और मार्जिन भी कम लगे और जिससे उनका प्रोडक्ट बच जाए तो उसे दूसरे दिन भी सेल किया जाए फिर वह वेफर्स के बिजनेस को शुरू करते हैं | शुरुआती दौर में वह वेंडर्स से वेफर्स को लिया करते थे परंतु वेंडर की तरफ से सही समय पर वेफर्स ना मिलने के कारण वह बाद में खुद ही वेफर्स को बनाने लग जाते हैं ,और सेल करने लग जाते हैं | इस दौरान उन्हें काफी अच्छा प्रॉफिट मिलने लगता है तो इसी को देखकर के वह धीरे-धीरे एक सिनेमा हॉल से दूसरे सिनेमा हॉल दूसरे सिनेमा हॉल से तीसरे सिनेमा हॉल और अनेक जगह जाने लगे और लोकल जगह में भी वेफर्स बेचना शुरू कर दिए | इसी तरह वह वेफर्स की मार्केट में अपना एक नींव रखते हैं और यहीं से उनकी वेफर्स कंपनी की शुरुआत हो जाती है |

Cycle से Wafers बेचा करते थे
शुरुआत में वह खुद ही वेफर्स को बनाया करते थे, और खुद ही वेफर्स को सेल किया करते थे | परंतु खुद वेफर्स को बनाकर खुद वेफर्स को सेल करने में काफी समय लग जाता था | तो इस चीज को उन्होंने ध्यान में रखकर अपने परिवार के सभी लोगों को धीरे-धीरे वेफर्स बनाना सिखाए और उन्हें वेफर्स के बिजनेस में शामिल किया | फिर वह धीरे-धीरे साइकिल से वेफर्स को लोकल्स में सिनेमा हॉल्स में और पूरे बाजार  में सेल किया करने , लगे उसके बाद वह साइकिल सेल करने लगे साइकिल से बाइक पर बाइक से फिर उन्होंने पूरे गुजरात में   90% मार्केट वेफर्स का कैप्चर कर लिया है |

4000 करोड़ को ठुकरा कर खड़ा किया खुद का 5000 करोड़ का कंपनी

बालाजी वेफर्स जब अपनी तरक्की के सफर में आगे बढ़ रहा था | तो उस वक्त उन्हें दूसरी कंपनियों से 4000 करोड़ की ऑफर मिलता है | और वह उस ऑफर को चंदू भाई विरानी ने ठुकरा कर यह कहा था कि यह कंपनी मेरे बच्चों के समान है और मैं अपने बच्चों को नहीं बेच सकता  हूं | और इसी चीज को उन्होंने अपने दिल से लगाकर आज वह 5000 करोड़ की कंपनी खुद खड़ा कर दिए हैं |

90 रुपए की सैलरी से आज 5000 करोड़ की कम्पनी

जब दुनिया हाथ से वेफर्स बनाया करती थी, तब 2003 में चंदू भाई विरानी ने मशीनों से वेफर्स और नमकीन बनाने की शुरुआत कर दी थी | और आज की डेट में वह 8 लाख किलो वेफर्स और 10 लाख किलो नमकीन प्रतिदिन बनाते हैं और उनके चार से भी ज्यादा प्लांट है तीन प्लांट गुजरात में एक प्लांट मध्य प्रदेश में और एक प्लांट उत्तर प्रदेश में है और उनके प्रोडक्ट की बात कर लिए जाए तो उनके पास 50 से भी अधिक अलग-अलग फ्लावर्स के वेफर्स के प्रोडक्ट्स और नमकीन के प्रोडक्ट्स है | और साथ ही इन्होंने पिछले साल 5000 करोड़ की सेल्स करे और  409 करोड़ की नेट प्रॉफिट किये | 

चंदू भाई विरानी की एक कहावत है जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रॉफिट से बिजनेस नहीं आता बिजनेस से प्रॉफिट आता है और अपने इसी कहावत को उन्होंने आज सच कर के दिखाया है|


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